Monday, August 31, 2020

Suraj Ki Aanch...

आईने में दिखा चाँद फ़िर ओझिल हो गया

 चढ़ा ही था आँखों में वो शख्स बन के नशा, 
बदले रुत में नज़रों से दरिया हो उतर भी गया !!

सूरज की आँच देख चेहरा निखर सा गया

बदगुमां रहा सारी उम्र जिस रोशनी से,
आज ख़ुद के साए की आहट से दिल डर सा गया !!

हज़ारों ख़्वाब का ख़िर्मन बिखर सा गया

तोड़ती रही पल - पल न जाने किसकी अना इनको,
हवा बन मिरे क़रीब से जाने कब वो गुज़र भी गया !!

किसी के गुमां के सहरा में दिल ख़ाक सा उड़ गया

उल्ट गई तदवीरें कहीं न फिर इलाज़ हुआ,
आख़िर में बीमार -ए- दिल को बदनाम कर ही गया !!

यक़ीन होता नहीं पर लब्ज़ अब इश्तिहार हो गया 


जहाँ दिखें धनक के रंग कई वो यहाँ अख़बार हो गया,
सुजूद तलाशती रूहों को सुकूं से कोसों दूर कर गया !! 




  

Sunday, August 23, 2020

Zindgii...mere jaisi haii...

कभी - कभी यूँ लगा, ज़िंदगी थम सी रहीं,

हर कदम पे ये घट सी रही, कोशिश करी बार बार यहीं,

रुकें नहीं कदम, बिना आए मंज़िल कहीं,

हर नाता, हर बाधा, ज़िंदगी की हर गाथा,

पलटते - पलटते ये महसूस हुआ,

जीवन है एक साधना, ये ज्ञान प्राप्त हुआ,

पता है मुझे अब, अपने हर ज़ख्म की गहराई का,

पैर जमीं पर हो तो चलता है पता, आसमां की ऊचाई का, 

तेज़ लहरों में ख़ुदको पहले भी थाम चूँकि, 

कश्ती से किनारें का पता जान चूँकि, उठे तूफां से क्या डरू, 

अब तो समंदर को नापना, सीख चूँकि हूँ मैं,

फिर भी लगती राहें बोझिल है, दूर अब भी इनसे साहिल है,

राह में कुछ कंकड़ भी चुभे, कई ठोकरें भी मिले,

रंग बदलती इस दुनियाँ में, बहार के मौसम कम हि मिले,

मुश्किल हालात में, पहलू में भीगे लम्हात थे,

संग दबे कुछ अल्फ़ाज़ लिए जा पहुँची,

दुनियाँ के बागीचे में, चादर सी बिछी दरीचे में,

देखने में लगी आँखों को भली, थी सात रंगों से सजी,

पूस की रात में जैसे, पशमीना ओढ़े थी खड़ी,

पल - पल में सुकून तलाशते फिरती है, 

जमीं की तरह ये भी कई परतों में खुलती है,

ये ज़िंदगी भी कुछ मेरे जैसी है..............

Tuesday, August 18, 2020

Tu Issh Tarah Se......

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है.............  
जहाँ तलक जाए ये नज़रे........  
लगे नज़ारों में तेरी कमी सी है,

तेरे बैगैर राहें भटक गई थी कहीं
ढूँढा हर शह, हर गली, हर मीनारों में, 
  
तुझ में खोकर हि हुई पूरी तलाश मेरी 
अब सिर्फ तू ही अपना जो रोशन गैरों की महफ़िल में है,

तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है...........  
ये आसमां ये सितारें कर रहें जहां रौशन 
फ़िर भी बैठा हूँ मैं शाम -ए- ग़म के अँधेरों में,

तलाश में तेरी कई मुद्दत से हूँ मैं 
ख़फ़ा हूँ पर तुझ में हूँ बाकि जगह लापता हूँ मैं, 

मैं हूँ एक जलता दिया तू जिसकी रोशनी है   
क्या कहूँ तुझ बिन ज़िंदगी लगती अधूरी है

पनाह में तेरी हर हसरतें भी मेरी क़ामिल है  
तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है.......... 




Friday, August 07, 2020

Khushboo...

हर तरफ मशहूर हुआ इतना
अब ग़ुमनाम होने की हसरत है
देखूँ जब भी आसमां
होने लगती दूरी से नफ़रत है
जलते दीये की रोशनी भी
तब चाँद सी लगती है
जब अजनबी शहर में 
अँधेरी रात.........  
थोड़ी ठहर कर गुज़रती है
चलो कुछ माहौल  
साझा करते है
खूबसूरत लोग और कुछ
खूबसूरती की बात करते है
करीने से लगा रखें है......  
टेबल पर मौसमी फूलों के 
जैसे बाज़ार सजा रखें है
आस - पास भिनना रहे 
कई चाहने वाले
छिनकर रंगत इसकी 
खुद को कहे इनके रखवाले
हो गया है इश्क़ इन्हें 
फूलों की संगत से
सोचे रंग - संग ख़ुश्बू भी 
कर दे इनके हवाले........ 
बचे कुछ कोरे पन्ने है 
सूखी जिसमें कुछ पंखुरियाँ है 
देख इन्हें लगता है 
हर साथ होता यहाँ अधूरा है.......   
कुछ बीती बातें है इस ज़िंदगी की 
अब भी अनकही.........  
मुड़कर यूँ देखती है मुझको 
जैसे जानती तक नहीं.......   

Monday, July 27, 2020

Ijaazat Toh Do....

कितनी रूमानी रातें यूँ ही छत पर गुज़री
कभी चहल कदमी में....कभी नंगी फ़र्श पर लेटे
आसमां को निहारते कहा कई दफ़ा 
मौसम -ए- हालात कैसा भी हो गुरेज़ नहीं 
कर सकूँ अपनी बेचैनियों की हिफाज़त इतनी मोहलत तो दो !!

सुबह की पहली किरण से पलकें है भाड़ी  
इनपर भी हो कभी ओस की बारिश
सोयी नहीं कब से नगमें हमारी  
छेड़ दे ज़रा वो धुन.....जो लगे तुझे प्यारी
इन गीतों की तरह आधे - अधूरे ख़्वाब है 
इन्हें फिर आँखों में सजोने की इजाज़त तो दो !!

धीमी - धीमी पिछली रात संग मेरे जो नज़म जली 
सुबह से मिलने भोर तक थी मेरे पास रुकी
फर्श पर अभी कतरन सी बिछी और थोड़ी सी राख़ बची
कर दूँ इसे मिट्टी के हवाले पहले जख़्मों पर मलने तो दो !!

आया है सावन..... मौसम लिए बारिश 
जमीं से मिलने की हो रही फिर से साज़िश 
दिल करता है मैं भी कर दूँ लम्हों को 
लफ़्ज़ों में बीत जाने की गुज़ारिश 
गीली पड़ी है दिल की जमीं इनमें ख़्वाब के बीज बोने तो दो !!



Saturday, July 18, 2020

Phir Yeh Raat Akelii...

कैसे कहूँ कैसे कटी रातें 
                       .........दिन निकला सुबह हुई 
    ........फिर हुई यादों की बरसातें 
सूखे से है दिन..... 
                     .......सूखी लगे शामे
सूखी - सूखी सी है..... ख़्वाब में भीगी रातें 
     बेचैन हुई रात फ़िर..... 
          .........सूरज से लगाई गुहार कई   
दूर कैसे रहें अँधेरों से है इसे प्यार भी
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
    .........छुपकर किरणों से फ़िर बनने मेरी सहेली
💫        💫           💫             💫
कुछ अपनी कहूँ..... 
          .........कुछ इसकी सुनूँ 
इक पल को भी संग इसके......चुप न रहूँ 
जो नीभ न पाई...... 
         ........उन वादों की देने दुहाई
लो इसी बहाने रात...... 
            ........फिर मुझसे मिलने आई  
💕        💕           💕              💕
सोचा कई बार.......छोड़ दूँ इसका भी साथ 
फिर याद आई.......  
          .........बीती रात जो थी वीरानी
गुज़रे पल थे ऐसे...... खड़ी सुनी हवेली जैसे
हर मोड़ मिली...... 
          .......पर जो न सुलझी वो तू पहेली  
बीतें दिनों की ठहरी 
            ........ तू ही मात्र सहेली 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली.....
💗          💗           💗            💗
गुज़री हर लम्हें मैं.......... 
          .........पर रहा रुका साया इंतज़ार में
कहने को इक बूँद न गिरी......  
  .........फिर भी भीगी हूँ इश्क़ की बरसात में  
न जाने दिल की कही.......  
                .......सच कब कैसे होगी
मद्धम चाँद और तारों को कब......
              ........नसीब अपनी रौशनी होगी
अंजाना सा डर है मुझे.......
   ........फिर भी चाहूँ दिल से दुआ दे तू मुझे
याद शहर से संग आई.......
               ........ तू ही बची एक करीबी है 
दिनों बाद आई......फिर ये रात अकेली......

    

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