Saturday, November 16, 2024

Jaa...Rahi Thi Mein

कितना अलबेला है संसार.......,  

उबड़ खाबड़ पगडण्डियाँ  

शरद से सुखी पड़ी है सारी डंडियाँ,

लो हो गई नए रुत की शुरूवात    

लगने लगी फिर ओसों की कतार !! 

नख सिकोड़ती, हर कदम से जमीं को टटोलती,

अक्स को अपने बूँदों में कहीं तलाशती  देखे  

जा रही थी मैं..........,  

आसमां के नीचे, नन्हीं किरणों से बचते

खुद को आँचल में जमीं के सिमटते देखे 

जा रही थी मैं............,

ये सोंधी मिट्टी की खुश्बू , जिसमें इत्र सा जादू

धीरे धीरे ही सही, अपने नसों में घुलते इसे देखे 

जा रही थी मैं............, 

आँखें खोलूँ या बंद रखूँ या और थोड़ा सब्र रखूँ 

इस बगियाँ में आज भी, खुदको ही अकेला देखे

जा रही थी मैं............., 

लगा हर तरफ है होड़, था मगर ये जज़्बातों का शोर

चाहा बहुत रहूँ बेअसर, फिर भी आ जाते है नज़र ये देखे

जा रही थी मैं.............,  

मिली फुर्सत न मुझे मेरे भँवर से, न जाने कब से इनसे घिरी हूँ, 

साल दर साल परत दर परत, सीलन सी इनमें पड़ी खुद को देखे  

जा रही थी मैं.............,   

💝💝💝

Saturday, July 22, 2023

Jadoo.....

 ऐसा लगता है आजकल.......,                      
                           .......  हम थोड़ा ज्यादा फ़िक्र में रहते है ! 

चलते चलते राहों में अकसर,कदम भी हिचकोले लेते है !!

सुनी राहों में भी अब, कहाँ हम अकेले होते है !!!

👫💖👫

अनसुनी हर आहट भी, अब तेरे आने का जिक्र करती है !

आते - जाते हर निशां को ये, बड़े गौर से देखा करती है !!

झिलमिल ही सही पर इन में, तेरे साथ का वो नज़ारा है !!!

💕💑💕

जो ढलती हर शाम हमने साथ, खुली आँखों से निहारा है !

उन तन्हाँ रातों की बात क्या करुँ, बात पुरानी सी लगती है !!
  
आज तो हर कली कहती कहानी, अपनी सी लगती है !!!

💓👌💗

जुगनुँओं से सजी ये रात, जिसमें तारे भी चमकते है !

दिया बाती है दुल्हा दुलहन आज,तो पतंगें बाराती से लगते है !!

क्या इन्हें तुमने, जमीं से पहले मेरी आँखों में उतारा है !! 

संग मेरे रहे तू ,तेरी फिक्र में मैं,
 
और कुछ न मिले इस जहाँ से.........आज से ये भी गवारा है !!! 

 💝💞💝  
 

Thursday, March 09, 2023

Ek Shaam......

मन के मरू पर लगा है गिद्धों का पहरा, 
दिल की दहलीज़ खुली फिर चमका एक भरम का तारा,
जिस्मों के भीड़ में भटक रहा जाने कब से रूह अकेला !!

शहरी लिबाज़ में लिपटा देहाती रेत सा मन,
हर कदम में फिसलती, हर लहर से गुजरती,     
आशाओं के गलियारें में आकर सिमटती !!

दूर कहीं से देखता और कहता मन का किनारा,
ये समंदर के नहीं,......मन के उठे भंवर है,
जो स्थिर लहरों में भी,कई सवाल लिए खड़े है !! 
 
अशांत लहरों में भी सीप सा शांत यूँ  बैठना, 
अपनी नख से जमी पड़ी रेत को कुरेदना,
आती - जाती किरणों का जब हथेली से हो सामना !!

ऐसी कल्पनाओं की एक शाम......,  
इंतज़ार था जाने कब से इस दहकती शाम का,
हर शुष्क याद जिसमें जल जाए और ढल जाए,
नम आँखों में बन के काज़ल गहरा !!

ये एक शाम,..... ढ़लती चाहत के नाम कर दूँ ,
आँखों के सीप खोलूँ और हर बूँद को मोती कर दूँ ,
गुम हो जाए न ये लहर में कहीं, 
सारे के सारे आज इस समंदर के नाम कर दूँ !!
 

Thursday, January 26, 2023

Poonam Ka Chaand....

  

क़िस्सा है पूनम की रात का.......,  

तारों के बीच बैठा,एक टुकड़ा चाँद का,

सबकी नज़रों से दूर है वो......,

पास होकर तारों के भी,खुद में मसरूफ है वो,

रोज़ ये आता है,यूहीं घाट लगाता है,

आज क्या बात है....क्या दिन कोई ख़ास है,

कभी आधा,कभी पूरा और आज तो,

पलक झपके बिना कर रहा दीदार वो,

जैसे लगता है धरा पर करने आया,

दिनों बाद फिर से अमृत पान वो....., 

तन्हा सांझ और सुखा कली का हर दुकान,

आँखों की शरा से ज़रा सी टपकी नमी और देखो खिल उठा नमी का चाँद,

चंद टुकड़े इसके,आओं बंज़र जमीं को बाँट दे,हर कली का ये माथा चूमें,इतने दिन जाने विरह के कैसे बीते, 

                          आज इस पल में सब बातों को विराम कर दे,

                       चलों ये रात,जुगनूओं,परो और परिंदों के नाम कर दे......,   



                                                                                                         


                    

 


Monday, October 03, 2022

Sawan Ki Ek Shaam.......

लो फिर से घनघोर अँधेरा छाया,
फिर छाई बदली की माया, 
जाने किस डर से....धर भरमाया,
बिन माँगे यहाँ किसने कुछ पाया.........  

अपने कोतुहल को शांत कर, 
कदमों की गति ज़रा थाम कर,  
देखा जब अपनी मुँडेर, 
जहाँ बैठा एक बटेर, 
तिनके लिए जो घनेर, 
एक - एक को तोड़मड़ोड़,
बांध रहा घर की मोड़..........,  

जाने क्या सोच रहा, 
हर तिनके को साध रहा, 
जाने कब से उस पर,  
आसमां भी आज छींक रहा.........,

अपने पर की छतरी ताने, 
सावन से वो दो चार हुआ,
एक पल को लगा मुझे, 
आज ये परिंदा नाक़ाम हुआ.........,

गिरती हर बूँद लगे,
जैसे,तीर कमान से पार हुआ,
खारेपन से इसके, 
परों को भी ये एहसास हुआ.........,      

आज ये मिलने धरती से नहीं,
कुछ और भी रंज़ दिल में लायी है,
भिगोने सिर्फ पत्तों को नहीं, 
परों के हौसले तोड़ने भी आयी है !!  

Tuesday, July 19, 2022

Aakhri Pal

आखिरी पल........, 

देख रही है नज़रे,.....  आज हर शख्श को ऐसे, 
बरसों की पहचान घुल रही हो,...... इस पल में आज जैसे,
नज़रे उठा सोच रही हूँ.......,  
जाने क्या इस पल में आख़िर ढूँढ रही हूँ !!

क़ायम रिश्ते इस जहाँ के, सब रह जाने यहाँ पे,
फिर भी नज़रे आस में है, जाने किस तलाश में है,
कई मौके ठगा गया हूँ मैं, शायद इसलिए जगा हूँ मैं, 
लगे जख्म गहरे है,..... पर रूहानी है, 
कर्म भुला हूँ,..... पर फल अभी भी बाकि है !!
  
भीड़ की पलकें भी ग़मगीन है, मेरी गुमशुदगी में,
कहती है......,   
कितना रखूँ में हिसाब, इनके गिराए कतरों का, 
मशगूल तो आज,.... जहां भी है, 
सोई धड़कनों को फिर से,..... जगाने में इतना !!
 
आसां नहीं इस जहां से, उस जहां का सफ़र, 
सुना है कभी....,
सुनी राहें.... और सामने खौफ़नाक मंज़र, 
हैरां लगता हूँ,..... थोड़ा परेशां भी दीखता हूँ,
अपने कब्र तक आते हर निशां को,... आज भी पहचानता हूँ !! 

माना......ये राह मैंने चुना नही, 
कोई तलब.... और कहने को कोई तज़ुर्बा नही, 
फिर भी इस दौड़ से कभी थका नही,
अकेला हूँ......, 
पर राही अकेला नही,..... जो इस राह चला हूँ मैं,
बस इसबात पर,......यकीं कर चला हूँ मैं !!
 

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