Saturday, March 28, 2020

Korona bole...


कोरोना बोले....., कोरोना.... कोरोना....सिर्फ करोना,

फैली गंदगी को भी थैली में.....तो भरोना  !!

फ़ुर्सत के मिले हैं,......चंद दिन ,

बेवज़ह उन्हें...... जाया मत करोना  !!

रोज की आपाधापी में,......कितने पल छाँटें हैं ?

जो अपनों संग बाँटें हैं,.....आँखों को भी चैन दे ,

कुछ और लम्हें,..... अपनों संग जोड़ ले !!

दुनियाँ के दरबार को..... छोड़ इस अख़बार को,

मोड़ न गर्दन टीवी ओर,.....रुख कर किचन की ओर, 

छन रही चाय अकेली,.....और अब पकौड़ों की पारी हैं ,

हाथ बटाने की बारी,..... आज तेरी आई हैं !!

बढ़ चला तेरे चश्में का नंबर,....पता तो कर,

चल रही क्या उम्र बच्चोँ की,.....ख़ुद भी कभी मालूम तो कर !!

वक़्त ख़र्च कर कमाया बहुत,.... संजोने की चाह में गवाँया बहुत,

फ़कत बैठ थोड़े दिन.....सुकून से घर को फ़िर......घरौंदा बनाओना  !! 

घर रह कर हि कोरोना पर वार...... करोना  !!

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