बचपन की टोली संग...... रंगों की होली 💦💦💦
मनचाहें रंगों से जहाँ ....... भरी होती थी झोली !
बेधड़क निकल गलियों में...... फिर बना टोली !!
आओं फिर से "मैं " को छोड़...... हो जाए "हमजोली "
उड़ाये मन के परिंदे..... बचे न कोई पंख कोरी !
ऐसी हो यारों हर...... फ़ागुन की होली 💞💞💞
बिखरु रंगों सा..... न पूछूँ क्या जात है तेरी !
निखरे मन ऐसे...... खुल जाये हर बंधन की डोरी !!
मग्न बैठ अपनों संग..... करते थे हम ठिठोली !
रंगों की मिलावट से थी......,
....... रिश्तों की सजावट अनोखी 💃💃💃
एक बार फ़िर......,
बड़ों ने प्यार और दुआ से....... भड़ दी है मेरी झोली !
गुजियों से आज फिर ...... लदी है मेरी हथेली !!
" हर रंग में हर धर्म और हर भाषा समाई हैं 🙇🙇🙇 "
" तू मान या न मान पर ये सच्चाई हैं 🙏🙏🙏 "

फेंटास्टिक। हैप्पी होली दी
ReplyDeletethanks..happy holi
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